बुधवार, 7 अप्रैल 2027
240 दिन शेषगुड़ी पड़वा और उगादि
महाराष्ट्र की गुड़ी, दक्खन का नववर्ष।
गुड़ी पड़वा और उगादि 2027 बुधवार 7 अप्रैल को हैं — चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, शालिवाहन शक चांद्र वर्ष का पहला दिन। महाराष्ट्र गुड़ी उभारता है: बाँस पर चमकीला वस्त्र, नीम-आम्रपल्लव, माला और उलटा कलश — द्वार पर विजय और नववर्ष की घोषणा। तेलुगु-कन्नड़ प्रदेश उगादि मनाते हैं: अभ्यंग स्नान, छह रसों की उगादि पचड़ी, और पंचांग-श्रवणम् — वर्ष का फल ऊँचे स्वर में बाँचा जाता है। यही दिन चैत्र नवरात्रि खोलता है, और सिंधी परंपरा में यही चेटी चंड है। इस गाइड में दोनों पर्वों की विधियाँ, पचड़ी का दर्शन, पंचांग-श्रवण की रीति, और वर्ष के पहले दिन का ज्योतिष है।
एक नज़र में
- 2027 में तिथि
- बुधवार 7 अप्रैल — चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
- नववर्ष
- शालिवाहन शक संवत का आरंभ
- महाराष्ट्र
- द्वार पर गुड़ी; श्रीखंड-पूरी
- तेलुगु-कन्नड़ प्रदेश
- उगादि — षड्रस पचड़ी, पंचांग-श्रवणम्
- इसी दिन
- चैत्र नवरात्रि आरंभ; सिंधी चेटी चंड
Kundli.me कैसे मदद करता है
नववर्ष की पहली बाँचना पंचांग है — अपने नगर का आज का पूरा पंचांग देखें, और वर्षफल में अपना वर्ष।
आज का पूरा पंचांगवर्ष यहीं से क्यों
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा परंपरा का सबसे उद्धृत प्रथम दिवस है: ब्रह्म पुराण सृष्टि का आरंभ ही इसी दिन मानता है, और शालिवाहन शक — दक्खन के पंचांगों की संवत-गणना — यहीं से खुलता है। वसंत द्वार पर है, रबी घर आ चुकी है, और पंचांग का नया खंड आरंभ होता है। जहाँ उत्तर का व्यापारिक नववर्ष कार्तिक (अन्नकूट-दिवस) से चलता है, दक्खन का लोक-धार्मिक वर्ष आज से — स्मरण कि भारत कई नववर्ष रखता है, हर एक का अपना तर्क।
गुड़ी उभारना, चरण-दर-चरण
- 1
स्नान और द्वार
दिन अभ्यंग स्नान से खुलता है, और स्वच्छ द्वार पर रंगोली।
- 2
दंड का शृंगार
बाँस के दंड पर चमकीला रेशमी वस्त्र — प्रायः हरा या केसरिया — फिर नीम-आम की टहनियाँ, साखर-गाठी की माला, और शीर्ष पर उलटा चाँदी या ताँबे का कलश।
- 3
स्थापना और पूजन
गुड़ी द्वार या खिड़की पर आकाशोन्मुख उभारी और हल्दी-कुमकुम, पुष्पों से पूजित होती है — वर्ष-सृष्टि के लिए ब्रह्मध्वज, घर के लिए विजय-पताका।
- 4
नीम और मिठास
पहले नीम-गुड़ चखा जाता है — वर्ष कड़वा-मीठा साथ स्वीकारा — फिर भोज: श्रीखंड-पूरी, पूरन पोली।
- 5
सूर्यास्त तक उतारना
गुड़ी दिन भर खड़ी रहती है और सूर्यास्त के आसपास प्रसाद सहित आदरपूर्वक उतारी जाती है — पताका फहराई जाती है, छोड़ी नहीं।
उगादि — पचड़ी और पंचांग
उगादि की थाली अपना दर्शन एक कटोरी में सिखाती है। उगादि पचड़ी छह रस मिलाती है — नीम का कड़वा, गुड़ की मिठास, इमली की खटाई, मिर्च की झाल, नमक, कच्चे आम की कसैली ताज़गी — और सब छहों खाते हैं: वर्ष सब कुछ लाएगा, और परिवार पूरा पहले ही स्वीकारता है। दिन का दूसरा केंद्र पंचांग-श्रवणम् है: पूजा के बाद नया पंचांग ऊँचे स्वर में बाँचा जाता है — वर्ष की वर्षा, फ़सलें, और हर राशि का फल — मंदिरों में पुरोहित, घर में बड़े-बुज़ुर्ग। कर्नाटक का बेवु-बेल्ला वही नीम-गुड़ पाठ दोहराता है।
चेटी चंड — सिंधी नववर्ष
सिंधी समुदाय के लिए यही प्रतिपदा (उनकी गणना में चैत्र का चाँद पहली बार दिखने का दिन) चेटी चंड है — नववर्ष और झूलेलाल जन्मोत्सव, जल-जन्मे संत जो समुदाय के इष्ट हैं। शोभायात्राएँ बहराणा साहिब जल तक ले जाती हैं; दिन में सिंधु-पार मुक्ति की सामुदायिक स्मृति है। एक तिथि, तीसरी परंपरा — इस पृष्ठ का चलता पाठ।
वर्ष की पहली कुंडली
पंचांग-श्रवण की रीति पर्व-रूप में ज्योतिष ही है: संवत्सर का स्वभाव इसी दिन की कुंडली से पढ़ा जाता है — वार से वर्षेश्वर, और पंचांग का सार्वजनिक फल उसी पाठ से। इसी यंत्र का व्यक्तिगत रूप वर्षफल है — आपके जन्म-अंश पर सूर्य की वापसी की कुंडली। आज का सच्चा अभ्यास: वर्ष का पंचांग सुनिए या पढ़िए, फिर अपना बनाइए — सार्वजनिक कुंडली बताती है वर्ष कैसा है; आपकी बताती है आपके लिए कैसा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2027 में गुड़ी पड़वा-उगादि कब हैं?
दोनों बुधवार 7 अप्रैल 2027 को — चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, शालिवाहन शक का नववर्ष-दिवस। उसी दिन चैत्र नवरात्रि आरंभ।
गुड़ी का वास्तविक अर्थ क्या है?
एक साथ ब्रह्मा की सृष्टि-ध्वजा और विजय-पताका — द्वार पर आकाशोन्मुख, ताकि वर्ष विजय-चिह्न तले प्रवेश करे। उस पर लगा नीम दिन का कड़वा-मीठा पाठ दोहराता है।
पर्व के दिन नीम क्यों?
क्योंकि वर्ष केवल मीठा नहीं होगा — पचड़ी और नीम-गुड़ दोनों घर से आने वाले वर्ष के छहों रस पहले ही, सोच-समझकर, साथ स्वीकार करवाते हैं।
पंचांग-श्रवणम् क्या है?
उगादि-पूजा के बाद नए वर्ष के पंचांग की सार्वजनिक बाँचना — वर्षा, फ़सलें और हर राशि का फल। यह समुदाय की वार्षिक ज्योतिष-बाँचना है; वर्षफल इसका व्यक्तिगत रूप।
क्या यह बैसाखी या विषु जैसा है?
पंचांग भिन्न: गुड़ी पड़वा/उगादि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को चांद्र वर्ष खोलते हैं; बैसाखी, विषु, पुत्तांडु, पोहेला बोइशाख लगभग सप्ताह भर बाद सौर वर्ष। आरंभ की ऋतु एक, प्रणालियाँ दो।
क्या गुड़ी पड़वा खरीद और शुभारंभ का शुभ दिन है?
हाँ — मराठी परंपरा के साढ़े तीन मुहूर्तों में गिना जाता है — पूरे दिन शुभ। किसी विशेष योजना के लिए उस दिन का पंचांग और आपकी कुंडली फिर भी चुनाव निखारते हैं।
इस पर्व के लिए मुफ़्त टूल
इस ऋतु के अन्य त्योहार
होलिका की अग्नि के बाद रंग — वसंत का महापर्व।
देवी की नौ वासंती रातें — हिंदू नववर्ष का आरंभ।
नवरात्रि के शिखर पर श्रीराम का जन्म।
चैत्र पूर्णिमा — बजरंगबली का जन्मोत्सव।
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