आज का गोचर — ग्रहों की वर्तमान स्थिति
हर ग्रह अभी कहाँ है — निरयण (लाहिरी) राशि, अंश, नक्षत्र, वक्री गति और उच्च/नीच — उपग्रहों और धीमे ग्रहों के आगामी राशि-प्रवेश सहित।
आज (2026-10-28): सूर्य तुला में, चंद्र वृषभ में, मंगल कर्क में, बुध तुला (वक्री) में, गुरु कर्क में, शुक्र तुला (वक्री) में, शनि मीन (वक्री) में, राहु कुंभ (वक्री) में, केतु सिंह (वक्री) में।
नौ ग्रहों की वर्तमान स्थिति
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र (पद) | स्थिति |
|---|---|---|---|---|
| सूर्य | तुला10.62° · स्वाति (2) | 10.62° | स्वाति (2) | नीच |
| चंद्र | वृषभ9.12° · कृत्तिका (4) | 9.12° | कृत्तिका (4) | उच्च |
| मंगल | कर्क22.49° · आश्लेषा (2) | 22.49° | आश्लेषा (2) | नीच |
| बुध | तुला25.62° · विशाखा (2) | 25.62° | विशाखा (2) | वक्री |
| गुरु | कर्क29.62° · आश्लेषा (4) | 29.62° | आश्लेषा (4) | उच्च |
| शुक्र | तुला4.04° · चित्रा (4) | 4.04° | चित्रा (4) | वक्रीस्वराशि |
| शनि | मीन15.29° · उत्तर भाद्रपद (4) | 15.29° | उत्तर भाद्रपद (4) | वक्री |
| राहु | कुंभ2.04° · धनिष्ठा (3) | 2.04° | धनिष्ठा (3) | वक्री |
| केतु | सिंह2.04° · मघा (1) | 2.04° | मघा (1) | वक्री |
उपग्रह (छाया-बिंदु)
पाँच सूर्य-आधारित उपग्रह (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र की गणना से) और गुलिक — ये पिंड नहीं, गणितीय बिंदु हैं।
| उपग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र (पद) |
|---|---|---|---|
| धूम | कुंभ23.95° · पूर्व भाद्रपद (2) | 23.95° | पूर्व भाद्रपद (2) |
| व्यतीपात | वृषभ6.05° · कृत्तिका (3) | 6.05° | कृत्तिका (3) |
| परिवेष | वृश्चिक6.05° · अनुराधा (1) | 6.05° | अनुराधा (1) |
| इन्द्रचाप | सिंह23.95° · पूर्व फाल्गुनी (4) | 23.95° | पूर्व फाल्गुनी (4) |
| उपकेतु | कन्या10.62° · हस्त (1) | 10.62° | हस्त (1) |
| गुलिक (मांदी) | धनुशनि के दिन-भाग के आरम्भ की लग्न राशि | शनि के दिन-भाग के आरम्भ की लग्न राशि | |
आगामी राशि-परिवर्तन (गोचर कैलेंडर)
गुरु, शनि, राहु और केतु के आगामी राशि-प्रवेश — वक्री होकर लौटना भी शामिल। यही गणना हमारे एआई ज्योतिषी के भविष्य-गोचर उत्तरों की आधारशिला है।
| ग्रह | राशि | से – तक | तक |
|---|---|---|---|
| गुरुअभी | कर्क | 28 अक्टू॰ 2026 – 31 अक्टू॰ 2026 | 31 अक्टू॰ 2026 |
| गुरु | सिंह | 31 अक्टू॰ 2026 – 24 जन॰ 2027 | 24 जन॰ 2027 |
| गुरु | कर्क | 24 जन॰ 2027 – 26 जून 2027 | 26 जून 2027 |
| गुरु | सिंह | 26 जून 2027 – 26 नव॰ 2027 | 26 नव॰ 2027 |
| गुरु | कन्या | 26 नव॰ 2027 – 28 फ़र॰ 2028 | 28 फ़र॰ 2028 |
| गुरु | सिंह | 28 फ़र॰ 2028 – 24 जुल॰ 2028 | 24 जुल॰ 2028 |
| गुरु | कन्या | 24 जुल॰ 2028 – 26 दिस॰ 2028 | 26 दिस॰ 2028 |
| गुरु | तुला | 26 दिस॰ 2028 – 29 मार्च 2029 | 29 मार्च 2029 |
| गुरु | कन्या | 29 मार्च 2029 – 25 अग॰ 2029 | 25 अग॰ 2029 |
| गुरु | तुला | 25 अग॰ 2029 – 27 अक्टू॰ 2029+ | 27 अक्टू॰ 2029+ |
| शनिअभी | मीन | 28 अक्टू॰ 2026 – 3 जून 2027 | 3 जून 2027 |
| शनि | मेष | 3 जून 2027 – 20 अक्टू॰ 2027 | 20 अक्टू॰ 2027 |
| शनि | मीन | 20 अक्टू॰ 2027 – 23 फ़र॰ 2028 | 23 फ़र॰ 2028 |
| शनि | मेष | 23 फ़र॰ 2028 – 8 अग॰ 2029 | 8 अग॰ 2029 |
| शनि | वृषभ | 8 अग॰ 2029 – 5 अक्टू॰ 2029 | 5 अक्टू॰ 2029 |
| शनि | मेष | 5 अक्टू॰ 2029 – 27 अक्टू॰ 2029+ | 27 अक्टू॰ 2029+ |
| राहुअभी | कुंभ | 28 अक्टू॰ 2026 – 5 दिस॰ 2026 | 5 दिस॰ 2026 |
| राहु | मकर | 5 दिस॰ 2026 – 23 जून 2028 | 23 जून 2028 |
| राहु | धनु | 23 जून 2028 – 27 अक्टू॰ 2029+ | 27 अक्टू॰ 2029+ |
| केतुअभी | सिंह | 28 अक्टू॰ 2026 – 5 दिस॰ 2026 | 5 दिस॰ 2026 |
| केतु | कर्क | 5 दिस॰ 2026 – 23 जून 2028 | 23 जून 2028 |
| केतु | मिथुन | 23 जून 2028 – 27 अक्टू॰ 2029+ | 27 अक्टू॰ 2029+ |
यह गोचर आपकी कुंडली पर कैसा बैठा है?
एक ही गोचर हर लग्न के लिए अलग फल देता है। ज्योतिष गुरु से पूछिए कि आज का आकाश आपके भावों और दशा के साथ क्या कह रहा है — निजी लाइव सत्र — प्रति-मिनट भुगतान, जब चाहें रोकें।
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गोचर पढ़ना सीखें — गोचर (ग्रह-गोचर) की मार्गदर्शिका — या देखें आज का पंचांग, अपनी साढ़े साती की स्थिति या अपनी कुंडली से शुभ मुहूर्त।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गोचर क्या है?
गोचर का अर्थ है — प्रत्येक ग्रह आज आकाश में कहाँ है, जन्म के समय की स्थिति से अलग। दशा ऋतु बताती है, गोचर उस ऋतु का मौसम।
ये स्थितियाँ सायन हैं या निरयण?
निरयण (लाहिरी अयनांश) — वैदिक ज्योतिष का मानक, और वही गणना जो इस साइट का कुंडली इंजन हर जगह प्रयोग करता है।
वक्री ग्रह का क्या अर्थ है?
ग्रह कुछ समय के लिए तारों की पृष्ठभूमि में उल्टा चलता दिखता है। शास्त्र में वक्री ग्रह अपने भाव के विषयों को दोबारा, विशेष तीव्रता से उठाता है। राहु-केतु स्वभाव से सदा वक्री हैं।
उपग्रह क्या हैं?
ये पिंड नहीं, संवेदनशील गणितीय बिंदु हैं: पाँच (धूम, व्यतीपात, परिवेष, इन्द्रचाप, उपकेतु) बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में सूर्य से निश्चित दूरी पर बताए गए हैं, और गुलिक शनि के दिन-भाग के आरम्भ की लग्न राशि है।
राशि-परिवर्तन कैलेंडर कितना आगे तक जाता है?
पृष्ठ पर तीन वर्ष आगे तक — गुरु, शनि, राहु और केतु के लिए, वक्री होकर लौटना भी शामिल। वही इंजन आवश्यकता पड़ने पर और गहराई तक गणना करता है: एआई ज्योतिष गुरु से किसी दूर के वर्ष के बारे में पूछें तो कैलेंडर उस वर्ष तक बढ़ाकर पढ़ा जाता है (2100 तक)।
आज का गोचर मेरी कुंडली पर कैसा फल देगा?
यह आपकी जन्म कुंडली पर निर्भर है — एक ही गोचर हर लग्न के लिए अलग भाव में पड़ता है। अपनी मुफ़्त कुंडली बनाइए और ज्योतिष गुरु से पूछिए कि आज का आकाश आपके भावों और दशा पर कैसे बैठा है।