बुधवार, 14 जुलाई 2027
338 दिन शेषदेवशयनी एकादशी
विष्णु शयन करते हैं — चातुर्मास आरंभ, मौसम का समापन।
देवशयनी एकादशी 2027 बुधवार 14 जुलाई को है — आषाढ़ शुक्ल एकादशी — जिस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग पर चार मास की योगनिद्रा में लेटते माने जाते हैं। चातुर्मास आरंभ होता है: विवाह, गृह प्रवेश और अधिकांश शुभारंभ नवंबर की देवउठनी एकादशी तक ठहरते हैं, और उनके स्थान पर वर्षा-ऋतु का व्रत-पाठ-यात्रा काल खुलता है। यही महाराष्ट्र की महान आषाढ़ी एकादशी है, जब पंढरपुर की वारी विठ्ठल-द्वार पहुँचती है। इस गाइड में शयन-कथा, एकादशी व्रत, चातुर्मास वस्तुतः क्या रोकता है और क्या खोलता है, वारी, और ऋतु का ईमानदार ज्योतिष — जिसमें मुहूर्त-पंचांग की समापन-स्थिति भी है।
एक नज़र में
- 2027 में तिथि
- बुधवार 14 जुलाई 2027
- तिथि
- आषाढ़ शुक्ल एकादशी
- क्या आरंभ
- चातुर्मास — विष्णु की चार मास की योगनिद्रा
- क्या ठहरता है
- विवाह व अधिकांश शुभारंभ — देवउठनी (नवंबर) तक
- साथ ही
- आषाढ़ी एकादशी — पंढरपुर वारी विठ्ठल तक
Kundli.me कैसे मदद करता है
मौसम की अंतिम तिथियाँ जुलाई की गणित तालिका में हैं — और पुनः उद्घाटन देवउठनी पर पहले से नियत है। अनुमान नहीं, इंजन से योजना बनाएँ।
जुलाई की अंतिम विवाह तिथियाँवह शयन जो वर्ष को क्रम देता है
इस एकादशी से कार्तिक की प्रबोधिनी तक विष्णु विश्राम करते हैं — और परंपरा अपने शुभारंभ उन्हीं के साथ विश्राम देती है। चौखट वर्षा की है: बरसात के चार मास उपमहाद्वीप के ठहरने के मास थे — मार्ग बंद, नदियाँ चढ़ीं, साधु चातुर्मास-वास में एक स्थान पर — और पंचांग ने इस विराम को पवित्र किया। पालनकर्ता शयन में, तो न नए घर में प्रवेश, न कन्यादान; ऋतु भीतर मुड़ती है: व्रत बहुगुणित, भागवत-रामायण के पारायण, और वर्ष की सबसे बड़ी पदयात्रा ठीक आज पंढरपुर पहुँचती है — परंपरा का स्मरण कि जब आरंभ ठहरते हैं, तब भक्ति चलती है।
एकादशी व्रत
- मानक एकादशी-अनुशासन: दिन भर अन्न-दाल वर्जित; सामर्थ्य से निर्जल या फलाहार; जहाँ रीति हो वहाँ रात जागरण-पाठ में; पारण अगली भोर द्वादशी की विहित अवधि में (नगर-सापेक्ष — लाइव पंचांग देखें)।
- कई घर आज चातुर्मास-नियम लेते हैं — चार मास एक अनुशासन: कोई भोजन छोड़ा, कोई नित्य पाठ लिया, कोई सेवा निभाई। परंपरा नियम के निर्वाह को ही ऋतु की असली आराधना मानती है।
- इस दिन का शास्त्रीय पाठ शयन-कथा और विष्णु सहस्रनाम है; वैष्णव घर ऋतु के पारायण आज से आरंभ करते हैं।
आषाढ़ी एकादशी — विठ्ठल-द्वार पर वारी
महाराष्ट्र में यह वर्ष की सबसे बड़ी एकादशी है: पंढरपुर की वारी — आलंदी से ज्ञानेश्वर और देहू से तुकाराम की पालखियाँ, जिन्हें लाखों वारकरी अभंग गाते हुए सप्ताहों पैदल लाते हैं — आज विठ्ठल-मंदिर पहुँचती है। दर्शन-पंक्तियाँ किलोमीटरों चलती हैं, नगर तुलसी-माला और भगवा पताकाओं का समुद्र बन जाता है, और राज्य पदयात्रियों के संग व्रत रखता है। वारी चातुर्मास का उद्घाटन-तर्क देह धरे है: चार मास, जब ईश्वर तक मार्ग पैदल है।
चातुर्मास क्या रोकता है — क्या खोलता है
| देवउठनी तक ठहरा | ऋतु के साथ खुला |
|---|---|
| विवाह — पंचांग बंद | व्रत-चक्र: एकादशियाँ, श्रावण-सोमवार, तीज |
| गृह प्रवेश, मुंडन, अधिकांश संस्कार | पर्व-चाप: नाग पंचमी, राखी, जन्माष्टमी, गणेश |
| नए उद्यमों के विधिवत उद्घाटन (रीति से) | पारायण, चातुर्मास-नियम, वारी और यात्राएँ |
यह रीति है, विधि नहीं: अनिवार्य कार्य (नौकरी-जॉइनिंग, न्यायालय-तिथि, चिकित्सा) चलते हैं — विराम वैकल्पिक शुभ-कार्यों पर है, और वहाँ भी समुदाय-भेद है।
समापन पर मुहूर्त-पंचांग
विवाह-नियोजकों के लिए यह एकादशी मौसम का पूर्ण विराम है: जो विवाह-वर्ष 20 नवंबर 2026 की देवउठनी से खुला, वह यहीं — 14 जुलाई 2027 — बंद होता है; अंतिम व्यावहारिक तिथियाँ जुलाई-आरंभ की तालिका में हैं, और पंचांग अगली देवउठनी पर पुनः खुलता है। हमारा जुलाई 2027 पृष्ठ रेखा के दोनों ओर हर दिन आँकता है, और सीज़न-अम्ब्रेला पूरा चाप रखता है। विराम-पार लक्ष्य रखने वाले परिवार नवंबर-आगे की तालिकाओं से योजना बनाएँ — जो इस साइट पर पहले से गणित हैं।
शयन-ऋतु का ज्योतिष
ऋतु का खगोल उसके भाव का आधार है: सूर्य दक्षिणायन में प्रवेश कर चुके हैं — कुछ दिन पहले की कर्क संक्रांति से आरंभ दक्षिणी अर्धवर्ष — जिसे शास्त्र देवताओं की रात्रि पढ़ते हैं: बाहरी आरंभों से अधिक भीतरी साधना का काल। चातुर्मास दक्षिणायन का भक्ति-रूप है। चार मासों का ईमानदार ज्योतिष: यह जप, पारायण और मन के ग्रहों — विशेषतः चंद्र के अनुशासनों — का शास्त्रीय अवसर है, और परिवार-परंपरा के विरुद्ध वैकल्पिक आरंभ ठेलने का गलत अवसर। शांत ऋतु आपकी अपनी कुंडली से क्या माँगती है, गुरु घटक-दर-घटक पढ़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2027 में देवशयनी एकादशी कब है?
बुधवार 14 जुलाई 2027, आषाढ़ शुक्ल एकादशी को; पारण अगली भोर। अपने नगर की सटीक अवधियाँ लाइव पंचांग पर देखें।
क्या सच में चार मास विवाह नहीं होते?
अधिकांश उत्तर-भारतीय परंपराओं में पंचांग आज से देवउठनी (नवंबर) तक बंद रहता है। कुछ समुदाय और दक्षिण भिन्न नियम रखते हैं। पंचांग-दृष्टि से इक्का-दुक्का अनुकूल दिन संभव है; परिवार प्रायः प्रतीक्षा करते हैं — और जुलाई-तालिका मौसम की वास्तविक अंतिम तिथियाँ दिखाती है।
चातुर्मास-नियम क्या है?
चार मास निभाया एक संकल्प — कोई भोजन छोड़ा, कोई नित्य पाठ-जप लिया, कोई नियमित सेवा। आज लिया, देवउठनी पर पूर्ण; परंपरा संकल्प के आकार से अधिक उसकी स्थिरता को मान देती है।
पंढरपुर वारी क्या है?
महाराष्ट्र की सदियों पुरानी पदयात्रा: लाखों वारकरी ज्ञानेश्वर-तुकाराम की पालखियों संग सप्ताहों पैदल चलकर इसी आषाढ़ी एकादशी को विठ्ठल के पंढरपुर पहुँचते हैं। यह विश्व की सबसे बड़ी वार्षिक पदयात्राओं में है।
चातुर्मास में कौन-से पर्व?
वर्ष का सघनतम खंड: कुछ ही दिनों में गुरु पूर्णिमा, फिर श्रावण-सोमवार, नाग पंचमी, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, पितृ पक्ष, नवरात्रि, दशहरा, दिवाली — और ऋतु देवउठनी के विवाह-उद्घाटन में पूर्ण होती है।
विवाह-मौसम ठीक कब पुनः खुलता है?
नवंबर की देवउठनी एकादशी पर — अगले दिन तुलसी विवाह प्रतीकात्मक पहला विवाह — यही चक्र इस साइट के सीज़न-पृष्ठ वर्ष-दर-वर्ष, हर दिन इंजन-आँका, दर्ज करते हैं।
इस पर्व के लिए मुफ़्त टूल
इस ऋतु के अन्य त्योहार
चैत्र पूर्णिमा — बजरंगबली का जन्मोत्सव।
अक्षय दिन — भारत का सबसे बड़ा मुहूर्त।
गुरु की पूर्णिमा — व्यास जयंती।
श्रावण की नाग पंचमी — दूध, मंत्र और काल सर्प उपाय।
अपनी कुंडली के बारे में लाइव सत्र में पूछिए
त्योहार का मुहूर्त सबके लिए एक है, आपकी कुंडली नहीं। ज्योतिष गुरु से पूछिए कि यह काल आपके करियर, विवाह, समय और उपायों के लिए क्या कहता है — 15 मिनट के निजी लाइव सत्र।
अपना सत्र शुरू करेंरोज़ का राशिफल, पंचांग व मुहूर्त — मुफ़्त पाइए इंस्टाग्राम · फ़ेसबुक · यूट्यूब · टेलीग्राम · एक्स · व्हाट्सएप चैनल पर।
मित्रों को बुलाइए — उन्हें पहले परामर्श पर 50% छूट, और उनके हर पेड सेशन पर आपको ₹20 नक़द। रेफ़र करें और कमाएँ
त्योहारों की तिथियाँ चंद्र आधारित हैं और हर वर्ष बदलती हैं — योजना से पहले पंचांग पर पुष्टि अवश्य करें।