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दिवाली (लक्ष्मी पूजा)

प्रकाश और माँ लक्ष्मी का पर्व।

8 नवंबर 2026 · 23 दिन बाकी 👉

कब है?

8 नवंबर 2026

रविवार

23 दिन बाकी

तिथि पंचांग से तय होती है; किसी तिथि के घटने-बढ़ने से कुछ स्थानों पर पर्व एक दिन आगे-पीछे मनाया जा सकता है।

क्यों मनाते हैं

दीपावली का अर्थ है “दीपों की पंक्ति”, और सबसे पहले यह पर्व यही है: कार्तिक की अमावस्या की रात्रि, जब आकाश से कोई प्रकाश नहीं आता, तब हर घर अपना प्रकाश स्वयं जुटाता है।

कथा और मान्यता

इस दिन पर किसी एक कथा का अधिकार नहीं; कई कथाएँ साथ-साथ चलती हैं, और कोई परिवार कौन-सी कहता है यह प्रायः उसके क्षेत्र पर निर्भर है।

कथा और मान्यता · आगे

उत्तर भारत में यह चौदह वर्ष के वनवास और रावण-वध के पश्चात् श्रीराम का अयोध्या लौटना है, जिसके स्वागत में पूरी नगरी दीपों से जगमगा उठी थी। पश्चिम और दक्षिण में बल इस बात पर है कि इससे एक दिन पूर्व श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया।

कथा और मान्यता · आगे

समुद्र मंथन से यह कथा आती है कि माँ लक्ष्मी इसी रात्रि क्षीरसागर से प्रकट हुईं — और यही कारण है कि पूजन उन्हीं का होता है।

मुख्य अनुष्ठान

• घर की तैयारी
• चौकी स्थापना
• पूज्य वस्तुओं का स्थापन
• दीप प्रज्वलन और संकल्प
• लक्ष्मी पूजन

दिवाली का पूजन अंधकार होने पर, प्रदोष काल में किया जाता है, जिसमें लक्ष्मी और गणेश का एक साथ पूजन होता है — पहले गणेश जी, जैसा हर कार्यारंभ में, और उनके बाईं ओर माँ लक्ष्मी।

देश भर में

• उत्तर भारत — श्रीराम के अयोध्या लौटने की कथा प्रधान है; प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश पूजन, पूरा घर प्रकाशित, और अगली प्रातः गोवर्धन पूजा तथा अन्नकूट।
• पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा — अमावस्या की रात्रि काली पूजा एवं श्यामा पूजा की है, जो देर रात तक चलती है।
• केरल — दिवाली यहाँ हल्के रूप में मनाई जाती है।

परंपराएँ घर-घर और क्षेत्र-क्षेत्र में अलग हैं; ये प्रमुख रूप हैं, सब जगह का नियम नहीं।

अक्सर पूछा जाता है

लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त क्या है?

हम समय नहीं, नियम देते हैं, क्योंकि समय हर नगर में भिन्न है। पूजन प्रदोष काल में होता है — वह अवधि जो आपके स्थानीय सूर्यास्त से आरंभ होकर लगभग दो घंटे चलती है — और परंपरा उसके भीतर स्थिर लग्न के उदय को वरीयता देती है, प्रायः वृषभ, जिसका स्वामी शुक्र है।

अक्सर पूछा जाता है · जवाब आगे

ये दोनों आपके नगर के सूर्यास्त पर निर्भर हैं, अतः दिल्ली के लिए छपा समय बेंगलुरु के लिए ग़लत है और अगले वर्ष फिर ग़लत। उस दिन अपने नगर का पंचांग देखें।

दिवाली (लक्ष्मी पूजा)

मुख्य बातें

तिथि — कार्तिक अमावस्या
आराध्य — गणेश सहित माँ लक्ष्मी; अनेक घरों में कुबेर एवं सरस्वती; बंगाल में माँ काली
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