Kundli.me · पर्व
देव जागते हैं — विवाह मुहूर्त आरंभ।
कब है?
शुक्रवार
35 दिन बाकी
तिथि पंचांग से तय होती है; किसी तिथि के घटने-बढ़ने से कुछ स्थानों पर पर्व एक दिन आगे-पीछे मनाया जा सकता है।
क्यों मनाते हैं
देव उठनी एकादशी कार्तिक शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है, और नाम में ही सब कुछ कह दिया गया है — देव उठनी, अर्थात् “देव जागते हैं”। मान्यता है कि भगवान विष्णु आषाढ़ की देवशयनी एकादशी से, अर्थात् चार चंद्र मास पहले से, क्षीरसागर में शेषनाग पर शयन करते हैं और इसी दिन जागते हैं।
कथा और मान्यता
चातुर्मास आषाढ़ की देवशयनी एकादशी से कार्तिक की प्रबोधिनी एकादशी तक का चार महीने का काल है — श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक, अर्थात् लगभग जुलाई से नवंबर। इस पूरे काल में शुभ आरंभ स्थगित रहते हैं।
कथा और मान्यता · आगे
यह कोई उत्सव नहीं, संयम की ऋतु है, और परंपरा की सबसे प्राचीन व्यवस्थाओं में से एक है।
मुख्य अनुष्ठान
नीचे दी गई विधि उत्तर भारत के अधिकांश घरों में प्रचलित रूप है।
देश भर में
परंपराएँ घर-घर और क्षेत्र-क्षेत्र में अलग हैं; ये प्रमुख रूप हैं, सब जगह का नियम नहीं।
अक्सर पूछा जाता है
चातुर्मास क्या है और उसमें क्या वर्जित रहता है?
चातुर्मास आषाढ़ की देवशयनी एकादशी से कार्तिक की देव उठनी एकादशी तक के चार चंद्र मास हैं — लगभग जुलाई से नवंबर। इस काल में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ, तथा अधिकांश परिवारों में संपत्ति एवं वाहन क्रय और नए व्यवसाय का आरंभ स्थगित रहता है।
अक्सर पूछा जाता है · जवाब आगे
पूजा-पाठ बिल्कुल नहीं रुकते; वर्ष के कई सबसे बड़े पर्व चातुर्मास के भीतर ही पड़ते हैं।
देवउठनी एकादशी
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