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छठ पूजा

सूर्य देव और छठी मैया की आराधना।

15 नवंबर 2026 · 30 दिन बाकी 👉

कब है?

15 नवंबर 2026

रविवार

30 दिन बाकी

तिथि पंचांग से तय होती है; किसी तिथि के घटने-बढ़ने से कुछ स्थानों पर पर्व एक दिन आगे-पीछे मनाया जा सकता है।

क्यों मनाते हैं

छठ कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान भास्कर और छठी मइया के लिए रखा जाने वाला व्रत है — “छठ” का अर्थ ही है छठी तिथि, कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी।

कथा और मान्यता

छठी मइया बाल्यावस्था की और छठे दिन की देवी हैं — वही छठा दिन, जिस पर इस अंचल के अनेक घरों में आज भी नवजात की “छठी” मनाई जाती है।

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उन्हें सूर्य की बहन कहा जाता है, और इसीलिए एक ही व्रत दोनों को समर्पित है: अरघ सूर्य को जाता है, प्रार्थना उनसे होती है, और माँगा प्रायः यही जाता है — संतान का आरोग्य और दीर्घायु।

कथा और मान्यता · आगे

जो एक बार घाट पर खड़ा हुआ है उसने यह गीतों में सुना है — छठ का लोकगीत-भंडार विशाल है, स्त्रियाँ बिना वाद्य के गाती हैं, और यह किसी लिखित ग्रंथ से कहीं अधिक इस पर्व का हृदय है।

मुख्य अनुष्ठान

• प्रसाद स्वयं तैयार करें
• दउरा और सूप सजाएँ
• नंगे पाँव घाट तक
• जल में खड़े होकर अर्घ्य
• कोसी भराई

नीचे दी गई विधि वही है जो बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अंचल में अधिकांश घरों में निभाई जाती है।

देश भर में

• बिहार — पटना के गंगा घाट, पुनपुन, सोन और हर गाँव का तालाब।
• पूर्वी उत्तर प्रदेश — वाराणसी, बलिया, गोरखपुर, देवरिया तथा पूरा पूर्वांचल गंगा, घाघरा और राप्ती के तट पर यह पर्व करता है।
• झारखंड और मिथिलांचल — राँची, जमशेदपुर, दरभंगा, मधुबनी।

परंपराएँ घर-घर और क्षेत्र-क्षेत्र में अलग हैं; ये प्रमुख रूप हैं, सब जगह का नियम नहीं।

अक्सर पूछा जाता है

छठ का व्रत कितने घंटे का होता है, क्या सचमुच निर्जला होता है?

हाँ — मूल व्रत निर्जला है, बिना अन्न और बिना जल के, और यह दूसरे दिन की संध्या को खरना के प्रसाद से लेकर चौथे दिन उषा अर्घ्य के बाद पारण तक चलता है, अर्थात् लगभग छत्तीस घंटे।

अक्सर पूछा जाता है · जवाब आगे

चारों दिनों में व्रती केवल दो ही बार आहार लेती हैं — पहले दिन का नहाय-खाय और खरना का प्रसाद।

छठ पूजा

मुख्य बातें

पूरी अवधि — चार दिन — नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य, उषा अर्घ्य
तिथि — कार्तिक शुक्ल षष्ठी ही छठ की तिथि है
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