Kundli.me · पर्व
गणपति विसर्जन का दिन।
कब है?
मंगलवार
333 दिन बाकी
तिथि पंचांग से तय होती है; किसी तिथि के घटने-बढ़ने से कुछ स्थानों पर पर्व एक दिन आगे-पीछे मनाया जा सकता है।
क्यों मनाते हैं
अनंत चतुर्दशी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी है, और इस एक दिन में तीन परंपराएँ एक साथ आती हैं। इनमें सबसे प्राचीन है अनंत व्रत — भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का व्रत, अर्थात् जिसका कोई अंत नहीं। इस दिन उन्हें अनंत पद्मनाभ रूप में पूजा जाता है, जो क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर विराजमान हैं।
कथा और मान्यता
इस दिन जो कथा पढ़ी जाती है, वह व्रत रखने वाले लगभग हर घर में सुनाई जाती है, और वह आशीर्वाद पाने तथा उसे पहचानने के अंतर की कथा है। सुमंतु ऋषि की पुत्री सुशीला का विवाह कौंडिन्य ऋषि से हुआ था।
कथा और मान्यता · आगे
पति के साथ यात्रा करते हुए उन्होंने नदी-तट पर कुछ स्त्रियों को अनंत व्रत करते देखा। उन्होंने पूछा कि यह क्या है, समझा, और स्वयं भी व्रत रखकर चौदह गाँठों का अनंत सूत्र अपनी भुजा पर बाँध लिया।
मुख्य अनुष्ठान
अधिकांश घरों में यह पूजा दिन के पूर्वार्ध में, स्नान के बाद और मुख्य भोजन से पहले की जाती है, और आरंभ से अंत तक यह विष्णु-पूजा ही है — विष्णु का पीत वर्ण इसमें सर्वत्र है: सूत्र में, पुष्पों में, वस्त्र में और नैवेद्य में।
देश भर में
परंपराएँ घर-घर और क्षेत्र-क्षेत्र में अलग हैं; ये प्रमुख रूप हैं, सब जगह का नियम नहीं।
अक्सर पूछा जाता है
अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन का मुहूर्त क्या है?
यह नगर और वर्ष के अनुसार बदलता है, क्योंकि यह आपके स्थानीय सूर्योदय तथा उस दिन के राहुकाल और चौघड़िया से निकलता है — इसीलिए यहाँ कोई समय नहीं छापा गया।
अक्सर पूछा जाता है · जवाब आगे
अधिकांश परिवार जो व्यावहारिक नियम मानते हैं वह यह है कि आरती और विदाई दिन में पूरी कर लें और राहुकाल में विसर्जन आरंभ न करें। उस दिन प्रातः अपने नगर का पंचांग देखें।
अनंत चतुर्दशी
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