ज्योतिष 30 सेकंड में
4 सवाल, पूरे जवाब
सवाल 1/4
मेरी आरंभिक महादशा कैसे तय होती है?
आपके जन्म के समय चंद्र जिस नक्षत्र में हो, उससे। 27 नक्षत्रों में से हर एक का स्वामी नौ विंशोत्तरी स्वामियों में से एक है, और वही स्वामी आपकी पहली महादशा का शासक होता है।
सवाल 1/4 · जवाब आगे
लग्न नहीं, चंद्र इसलिए क्योंकि ज्योतिष में चंद्र वह मन है जिससे अनुभव का समय निर्धारित होता है।
सवाल 2/4
'दशा शेष' का क्या अर्थ है?
आप शायद ही कभी अपनी पहली महादशा के ठीक आरंभ पर जन्म लेते हैं, इसलिए जन्म के समय उसका केवल कुछ भाग शेष रहता है। वही शेष भाग दशा शेष है।
सवाल 2/4 · जवाब आगे
यह महादशा की पूरी अवधि गुणा चंद्र के आगे बचे नक्षत्र-अंश के बराबर होता है। केवल पहली दशा आंशिक होती है; बाद की हर दशा पूरी चलती है।
सवाल 3/4
महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर्दशा में क्या अंतर है?
ये एक ही समयरेखा की परस्पर-निहित परतें हैं। महादशा प्रमुख अध्याय है (6 से 20 वर्ष), अंतर्दशा उसके भीतर उप-अवधि, और प्रत्यंतर्दशा उसके भीतर उप-उप-अवधि।
सवाल 3/4 · जवाब आगे
हर परत वही क्रम व वही समानुपातिक सूत्र उपयोग करती है, जिससे महीनों व दिनों तक क्रमशः सूक्ष्म समय मिलता है।
सवाल 4/4
क्या राहु या शनि की दशा बुरी होती है?
कोई सार्वभौमिक उत्तर नहीं। दशा वही देती है जो उसका स्वामी आपकी विशिष्ट कुंडली में दर्शाता है, इसलिए सुस्थित शनि जीवन की सर्वोत्तम अवधियों में से एक दे सकता है, जबकि पीड़ित शनि भारी हो सकता है।
सवाल 4/4 · जवाब आगे
वृषभ व तुला लग्न के लिए शनि योगकारक है और उसकी दशा अक्सर करियर व स्थिरता बनाती है।
विंशोत्तरी दशा: आपकी ग्रह-समयरेखा
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