ज्योतिष 30 सेकंड में
4 सवाल, पूरे जवाब
सवाल 1/4
राहु और केतु क्या हैं?
ये दो चंद्र-पात हैं — वे बिंदु जहाँ चंद्रमा की कक्षा क्रांतिवृत्त (सूर्य के आभासी पथ) को काटती है। ये भौतिक पिंड नहीं, इसलिए वैदिक ज्योतिष इन्हें छाया-ग्रह कहता है। राहु उत्तर पात है व केतु दक्षिण, और ये सदा एक-दूसरे के ठीक सामने रहते हैं।
सवाल 2/4
राहु और केतु में क्या अंतर है?
राहु सांसारिक इच्छा, महत्वाकांक्षा, आसक्ति, विदेशी व अपरंपरागत वस्तुओं, और विस्तार का कारक है — जिसे छुए उसे बढ़ाता है और बाहर की ओर खींचता है।
सवाल 2/4 · जवाब आगे
केतु वैराग्य, आध्यात्मिकता, पूर्व-जन्म विषयों, आकस्मिक हानि व मोक्ष का कारक है — जो सिकोड़ता, परिष्कृत करता और भीतर मोड़ता है।
सवाल 3/4
क्या राहु-केतु सदा अशुभ होते हैं?
नहीं। ये तीव्र व सीमा-लाँघते हैं, पर सुस्थित राहु असाधारण सांसारिक सफलता और सुस्थित केतु गहन अंतर्दृष्टि व आध्यात्मिक उन्नति दे सकता है। इनका फल राशि, भाव, संग व दशा पर निर्भर करता है, ठीक किसी अन्य ग्रह की तरह।
सवाल 4/4
काल सर्प दोष क्या है?
काल सर्प दोष वह स्थिति है जब सातों अन्य ग्रह राहु-केतु अक्ष के एक ओर आ जाएँ, दोनों पातों के बीच घिरे। कहा जाता है कि यह कुंडली की ऊर्जा केंद्रित करता है और संघर्ष या विलंब जोड़ता है, यद्यपि शास्त्र इसे सावधानी से देखते हैं और अनेक कारक इसे नरम करते हैं।
राहु व केतु (छाया-ग्रह)
पूरी व्याख्या और सभी 4 सवाल-जवाब, विस्तार से।
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