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तुलसी विवाह

ऋतु का पहला विवाह — तुलसी और शालिग्राम।

21 नवंबर 2026 · 36 दिन बाकी 👉

कब है?

21 नवंबर 2026

शनिवार

36 दिन बाकी

तिथि पंचांग से तय होती है; किसी तिथि के घटने-बढ़ने से कुछ स्थानों पर पर्व एक दिन आगे-पीछे मनाया जा सकता है।

क्यों मनाते हैं

तुलसी विवाह तुलसी के पौधे का शालिग्राम से विधिवत विवाह है — शालिग्राम गंडकी नदी की वह श्याम शिला है जिसे वैष्णव परंपरा साक्षात विष्णु मानकर पूजती है। उस दिन आँगन की तुलसी को पौधा नहीं माना जाता: वे वधू होती हैं।

कथा और मान्यता

इसके पीछे वृंदा की कथा है — असुर जालंधर की परम पतिव्रता पत्नी, जिनके सतीत्व के तेज से जालंधर अवध्य हो गया था।

कथा और मान्यता · आगे

भगवान विष्णु ने जालंधर का रूप धरकर वह रक्षा-कवच भंग किया; सत्य जानकर वृंदा ने विष्णु को शिला — शालिग्राम — होने का शाप दिया और स्वयं अग्नि में प्रवेश किया। उनकी चिता की भस्म से तुलसी का पौधा उगा।

कथा और मान्यता · आगे

वृंदा की भक्ति से बँधे विष्णु ने वचन दिया कि हर वर्ष इसी दिन वे तुलसी से विवाह करेंगे, और बिना तुलसी-दल के उनकी कोई पूजा पूर्ण नहीं होगी। हर कार्तिक में तुलसी विवाह वही वचन निभाता है।

मुख्य अनुष्ठान

• मंडप की तैयारी
• वधू का शृंगार
• वर का आसन
• संकल्प और कन्यादान
• गठबंधन और फेरे

देश भर में

• महाराष्ट्र — तुळशीचे लग्न: यह अपने मंगलाष्टक श्लोकों के साथ पूरा विवाह होता है, जो संयोग-क्षण पर गाए जाते हैं।
• दक्षिण भारत — उत्थान द्वादशी / क्षीराब्धि द्वादशी: कर्नाटक, आंध्र और तमिल परंपरा में यही द्वादशी क्षीरसागर में विष्णु के जागरण का दिन है।
• बंगाल और पूर्व: तुलसी का साँझ-दीप पुरानी नित्य-रीति है।

परंपराएँ घर-घर और क्षेत्र-क्षेत्र में अलग हैं; ये प्रमुख रूप हैं, सब जगह का नियम नहीं।

अक्सर पूछा जाता है

एक पौधे का विवाह शिला से क्यों?

वृंदा की कथा के कारण: उनके शाप से विष्णु शालिग्राम शिला बने, और उनकी भक्ति से बँधकर उन्होंने वचन दिया कि तुलसी रूप में जन्मी वृंदा से हर वर्ष विवाह करेंगे। यह विधान भक्ति को विवाह का सर्वोच्च रूप मानकर पूजता है।

तुलसी विवाह

मुख्य बातें

तिथि — कार्तिक शुक्ल द्वादशी
वर-वधू — तुलसी (लक्ष्मी स्वरूपा) और शालिग्राम (विष्णु स्वरूप)
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