Kundli.me · पर्व

पितृ पक्ष

पितरों का पखवाड़ा — श्राद्ध और तर्पण।

16 सितंबर – 30 सितंबर 2027 · 335 दिन बाकी 👉

कब है?

16 सितंबर – 30 सितंबर 2027

गुरुवार से

335 दिन बाकी

तिथि पंचांग से तय होती है; किसी तिथि के घटने-बढ़ने से कुछ स्थानों पर पर्व एक दिन आगे-पीछे मनाया जा सकता है।

क्यों मनाते हैं

पितृ पक्ष — जिसे श्राद्ध पक्ष, महालय पक्ष या कनागत भी कहते हैं — वह पखवाड़ा है जिसे परंपरा ने पितृ-ऋण के लिए नियत किया है। मान्यता सरल और प्राचीन है: इन दिनों पितर समीप आते हैं, और श्रद्धा से जो अर्पित होता है — जल, तिल, अन्न, स्मरण — वह उन तक पहुँचता है।

कथा और मान्यता

श्राद्ध शब्द ही श्रद्धा से बना है।

कथा और मान्यता · आगे

दिवंगतों के लिए श्रद्धा से किया गया कोई भी कर्म श्राद्ध है: पूर्ण रूप में यह गया, प्रयागराज या हरिद्वार जैसे तीर्थ में पिंडदान है; सरलतम रूप में दक्षिणाभिमुख होकर अपने हाथों से तिल-सहित जल का अर्पण, पितर का नाम लेकर।

कथा और मान्यता · आगे

दोनों श्राद्ध हैं; पखवाड़ा वही माँगता है जो परिवार सच्चे मन से कर सके।

मुख्य अनुष्ठान

• तैयारी
• जनेऊ का क्रम
• जल अर्पण
• पहले उन्हें, फिर स्वयं
• स्मरण

अक्सर पूछा जाता है

पितर की देहांत-तिथि ज्ञात नहीं है। क्या करें?

इसीलिए सर्व पितृ अमावस्या है — अंतिम दिन समस्त पितरों के लिए है, ज्ञात-अज्ञात सभी तिथियों के लिए, और उनके लिए भी जिनकी तिथि पखवाड़े में छूट गई हो।

पितृ पक्ष

मुख्य बातें

पक्ष — आश्विन कृष्ण पक्ष (पूर्णिमांत गणना)
किनके लिए — तीन पीढ़ियों के दिवंगत पूर्वज — पितृगण
पूरी जानकारी पढ़ें

Kundli.me

श्राद्ध उसी तिथि पर होता है जिस तिथि पर पूर्वज का देहांत हुआ — किसी भी दिन की तिथि हमारे लाइव पंचांग में देखें, और गुरु से पूछें कि आपकी कुंडली में पितृ दोष पर शास्त्र क्या कहते हैं।

किसी भी दिन की तिथि देखें और स्टोरी देखिए