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महाशिवरात्रि

शिव की महान रात — व्रत, जागरण, अभिषेक।

6 मार्च 2027 · 141 दिन बाकी 👉

कब है?

6 मार्च 2027

शनिवार

141 दिन बाकी

तिथि पंचांग से तय होती है; किसी तिथि के घटने-बढ़ने से कुछ स्थानों पर पर्व एक दिन आगे-पीछे मनाया जा सकता है।

क्यों मनाते हैं

हर चांद्र मास में एक शिवरात्रि होती है — कृष्ण चतुर्दशी की रात — पर फाल्गुन अमावस्या से पहले वाली महा है: महान।

कथा और मान्यता

तीन कथाएँ इस रात को साझा करती हैं। यह शिव-पार्वती विवाह की रात मानी जाती है — इसीलिए अविवाहित कन्याएँ योग्य वर के लिए और विवाहित घर स्वयं विवाह के लिए व्रत रखते हैं।

कथा और मान्यता · आगे

यह हलाहल की रात है: समुद्र-मंथन ने अमृत से पहले विष उगला, शिव ने उसे पीकर कंठ में धारण किया — वही नीलकंठ, जिनके जागरण की प्रतिध्वनि भक्तों का रतजगा है। और यह वह रात है जब लिंग को आदि-अंत-रहित ज्योति-स्तंभ रूप में पूजा जाता है।

कथा और मान्यता · आगे

विवाह, विष, ज्योति — एक रात, तीनों भार।

मुख्य अनुष्ठान

• प्रहर जानें
• द्रव्य, क्रम से
• बेल और शेष
• मंत्र और रात

देश भर में

• काशी और उज्जैन: वह रात जब नगर सोता नहीं; महाकाल की भस्म-आरती का मौसम चरम पर, और पुरानी गलियों में शिव की बारात — वेश धरे गण।
• कश्मीर: हेरथ — घाटी का सबसे बड़ा पर्व, कश्मीरी पंडित घरों की वटक-पूजा के साथ; प्रसाद में भीगे अखरोट।
• नेपाल: पशुपतिनाथ में लाखों साधु-यात्री — भारत के बाहर उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा शिवरात्रि-समागम।

परंपराएँ घर-घर और क्षेत्र-क्षेत्र में अलग हैं; ये प्रमुख रूप हैं, सब जगह का नियम नहीं।

अक्सर पूछा जाता है

अधिकांश पर्वों के विपरीत यह रात में क्यों?

परंपरा शिव-आराधना को चंद्रमा की सबसे क्षीण घड़ी में रखती है — अमावस्या-पूर्व चतुर्दशी की रात — और भक्त से उसमें जागते रहने को कहती है। रूप ही शिक्षा है: अंधकार में स्थिरता, स्वयं नीलकंठ का जागरण।

महाशिवरात्रि

मुख्य बातें

तिथि — फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी — निशीथ-व्यापिनी
व्रत — दिन उपवास, रात जागरण; पारण अगली भोर
पूरी जानकारी पढ़ें

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शिवरात्रि शनि और चंद्र के उपायों की भी शास्त्रीय रात है — गुरु से जानें कि आपकी अपनी कुंडली क्या माँगती है।

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