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हनुमान जयंती

चैत्र पूर्णिमा — बजरंगबली का जन्मोत्सव।

20 अप्रैल 2027 · 186 दिन बाकी 👉

कब है?

20 अप्रैल 2027

मंगलवार

186 दिन बाकी

तिथि पंचांग से तय होती है; किसी तिथि के घटने-बढ़ने से कुछ स्थानों पर पर्व एक दिन आगे-पीछे मनाया जा सकता है।

क्यों मनाते हैं

ऋषि-वचन से वानरी रूप में जन्मी अप्सरा अंजना ने पुत्र हेतु शिव की आराधना की; पवन देव उन तक दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ का प्रसाद-पायस ले गए — वही प्रसाद जिसने अयोध्या को चार राजकुमार दिए। अतः हनुमान जन्म से ही दुहरे जुड़े हैं: वरदान से शिव-अंश, साझे प्रसाद से राम-बंधु, और वहन से पवन-पुत्र।

मुख्य अनुष्ठान

• सूर्योदय से पहले
• सिंदूर-चोला
• पाठ
• प्रसाद और दान

देश भर में

• तमिळ परंपरा: हनुमथ् जयंती मार्गழி (दिस.–जन.) में, अमावस्या-समीप मूलम् नक्षत्र के दिन।
• कर्नाटक: मार्गशीर्ष शुद्ध त्रयोदशी का हनुमद् व्रत।
• सब एक ही श्रद्धा, पंचांग भिन्न — अपने क्षेत्र की मानें; इस पृष्ठ के तिथि-खंड उत्तर की चैत्र पूर्णिमा पर चलते हैं।

परंपराएँ घर-घर और क्षेत्र-क्षेत्र में अलग हैं; ये प्रमुख रूप हैं, सब जगह का नियम नहीं।

अक्सर पूछा जाता है

जन्म-आरती कब होती है?

सूर्योदय पर — परंपरा की जन्म-बेला — जो नगर से बदलती है। अपने नगर का सूर्योदय लाइव पंचांग पर देखें; मंदिर प्रायः पौ फटने से पहले पाठ आरंभ कर देते हैं।

हनुमान जयंती

मुख्य बातें

जन्म-बेला — सूर्योदय की मानी गई — मंदिर भोर से पहले खुलते हैं
पाठ — हनुमान चालीसा; सुंदरकांड; जहाँ रीति हो वहाँ बजरंग बाण
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