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अक्षय तृतीया

अक्षय दिन — भारत का सबसे बड़ा मुहूर्त।

9 मई 2027 · 205 दिन बाकी 👉

कब है?

9 मई 2027

रविवार

205 दिन बाकी

तिथि पंचांग से तय होती है; किसी तिथि के घटने-बढ़ने से कुछ स्थानों पर पर्व एक दिन आगे-पीछे मनाया जा सकता है।

क्यों मनाते हैं

इस तिथि पर कथाएँ अर्पणों की तरह चढ़ी हैं: सुदामा की मुट्ठी भर पोहा राज्य बनकर लौटी; द्रौपदी को अक्षय पात्र मिला — जो कभी रीता नहीं; व्यास के वाचन पर गणेश ने महाभारत-लेखन आज आरंभ किया; त्रेता युग का आरंभ इसी से माना गया; कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष नियुक्त हुए।

अक्सर पूछा जाता है

क्या आज स्वर्ण खरीदना अनिवार्य है?

नहीं — यह स्थायी संपदा घर लाने की पुरानी रीति का एक आधुनिक रूप भर है। दिन का शास्त्रीय प्रथम कर्म दान है; आज दिया रुपया उतना ही अक्षय माना गया है जितना खरीदा स्वर्ण। सामर्थ्य में खरीदें, या दें।

अक्षय तृतीया

मुख्य बातें

तिथि — वैशाख शुक्ल तृतीया
'अक्षय' क्यों — आज का आरंभ और दान क्षयहीन माना जाता है
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