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अहोई अष्टमी

संतान की मंगलकामना का व्रत, तारों के दर्शन पर पारण।

1 नवंबर 2026 · 16 दिन बाकी 👉

कब है?

1 नवंबर 2026

रविवार

16 दिन बाकी

तिथि पंचांग से तय होती है; किसी तिथि के घटने-बढ़ने से कुछ स्थानों पर पर्व एक दिन आगे-पीछे मनाया जा सकता है।

क्यों मनाते हैं

अहोई अष्टमी कार्तिक कृष्ण पक्ष का दूसरा बड़ा व्रत है: करवा चौथ पति के लिए, तो अहोई संतान के लिए। माताएँ — परंपरा में पुत्रवती माताएँ, जीवंत व्यवहार में सभी संतानों की माताएँ — भोर से पहले से निर्जल व्रत रखती हैं और संध्या को अहोई माता की पूजा करती हैं।

कथा और मान्यता

एक साहूकार की पत्नी के सात पुत्र थे। दिवाली से कुछ दिन पहले वह आँगन लीपने के लिए जंगल के किनारे मिट्टी खोदने गई। खुरपी नीचे उतरी और स्याहु — साही माता — की माँद पर जा लगी; उसके बच्चे उसी में मारे गए। स्त्री दुखी हुई, पर किसी से कुछ न कहा।

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वर्ष भीतर उसका बड़ा पुत्र चल बसा; अगले वर्ष अगला; और सातों चले गए। टूटी हुई स्त्री ने गाँव की एक वृद्धा से पुराना संयोग कह सुनाया।

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वृद्धा बोली: जो शोक तुम्हारे घर आया, वह उस माँ के शोक से आया जो तुमसे हुआ — कार्तिक कृष्ण की अष्टमी को संतान की रक्षिका अहोई माता से क्षमा माँगो, और उनके पास स्याहु और उसके बच्चों का चित्र बनाओ।

मुख्य अनुष्ठान

• भोर का संकल्प
• दीवार और जल की स्थापना
• भोग
• कथा
• तारे, और पारण

देश भर में

• उत्तर भारत (यूपी, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, एमपी): दीवार-चित्र, चौदह पुए, तारों का अर्घ्य — वही रूप जो इस गाइड में है।
• ब्रज: इसी अष्टमी पर राधा कुंड स्नान, विशेषतः संतान-कामी दंपतियों द्वारा।
• स्याहु की माला: चाँदी की माला जिसमें स्याहु का लटकन।

परंपराएँ घर-घर और क्षेत्र-क्षेत्र में अलग हैं; ये प्रमुख रूप हैं, सब जगह का नियम नहीं।

अक्सर पूछा जाता है

व्रत तारों पर खुलता है या चाँद पर?

अधिकांश परिवार तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं; कुछ कुल-परंपराएँ चंद्रोदय की प्रतीक्षा करती हैं, जो अष्टमी की रात देर से होता है। अपने परिवार की रीति मानें — दोनों प्रतिष्ठित हैं।

अहोई अष्टमी

मुख्य बातें

तिथि — कार्तिक कृष्ण अष्टमी
व्रत — माताओं का निर्जला व्रत, भोर से तारों के दर्शन तक
पूरी जानकारी पढ़ें

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यह पर्व संतान के मंगल का है — अपने बच्चे की मुफ़्त जन्म कुंडली बनाएँ, और अपनी कुंडली में पंचम भाव (संतान भाव) देखें।

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